Saturday, May 3, 2025

5>||*रामचरित मानस के कुछ रोचक तथ्य*🏹

5>||*रामचरित मानस के कुछ रोचक तथ्य*


1:~लंका में राम जी = 111 दिन रहे।

2:~लंका में सीताजी = 435 दिन रहीं।

3:~मानस में श्लोक संख्या = 27 है।

4:~मानस में चोपाई संख्या = 4608 है।

5:~मानस में दोहा संख्या = 1074 है।

6:~मानस में सोरठा संख्या = 207 है।

7:~मानस में छन्द संख्या = 86 है।


8:~सुग्रीव में बल था = 10000 हाथियों का।

9:~सीता रानी बनीं = 33वर्ष की उम्र में।

10:~मानस रचना के समय तुलसीदास की उम्र = 77 वर्ष थी।

11:~पुष्पक विमान की चाल = 400 मील/घण्टा थी।

12:~रामादल व रावण दल का युद्ध = 87 दिन चला।

13:~राम रावण युद्ध = 32 दिन चला।

14:~सेतु निर्माण = 5 दिन में हुआ।


15:~नलनील के पिता = विश्वकर्मा जी हैं।

16:~त्रिजटा के पिता = विभीषण हैं।


17:~विश्वामित्र राम को ले गए =10 दिन के लिए।

18:~राम ने रावण को सबसे पहले मारा था = 6 वर्ष की उम्र में।

19:~रावण को जिन्दा किया = सुखेन बेद ने नाभि में अमृत रखकर।


 *श्री राम के दादा परदादा का नाम क्या था?* 

 *नहीं तो जानिये-* 

1 - ब्रह्मा जी से मरीचि हुए,

2 - मरीचि के पुत्र कश्यप हुए,

3 - कश्यप के पुत्र विवस्वान थे,

4 - विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए.वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था,

5 - वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था, इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुलकी स्थापना की |

6 - इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए,

7 - कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था,

8 - विकुक्षि के पुत्र बाण हुए,

9 - बाण के पुत्र अनरण्य हुए,

10- अनरण्य से पृथु हुए,

11- पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ,

12- त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए,

13- धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था,

14- युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए,

15- मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ,

16- सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित,

17- ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए,

18- भरत के पुत्र असित हुए,

19- असित के पुत्र सगर हुए,

20- सगर के पुत्र का नाम असमंज था,

21- असमंज के पुत्र अंशुमान हुए,

22- अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए,

23- दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए, भागीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतारा था.भागीरथ के पुत्र ककुत्स्थ थे |

24- ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए, रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया, तब से श्री राम के कुल को रघु कुल भी कहा जाता है |

25- रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए,

26- प्रवृद्ध के पुत्र शंखण थे,

27- शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए,

28- सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था,

29- अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग हुए,

30- शीघ्रग के पुत्र मरु हुए,

31- मरु के पुत्र प्रशुश्रुक थे,

32- प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए,

33- अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था,

34- नहुष के पुत्र ययाति हुए,

35- ययाति के पुत्र नाभाग हुए,

36- नाभाग के पुत्र का नाम अज था,

37- अज के पुत्र दशरथ हुए,

38- दशरथ के चार पुत्र राम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हुए |

इस प्रकार ब्रह्मा की उन्चालिसवी (39) पीढ़ी में श्रीराम का जन्म हुआ |

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*श्री राम के दादा परदादा का नाम क्या था?* 

শ্রী শ্রী রামচন্দ্রের বংশ পরিচয়----

1 - ब्रह्मा जी से मरीचि हुए,

2 - मरीचि के पुत्र कश्यप हुए,

3 - कश्यप के पुत्र विवस्वान थे,

4 - विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए.वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था,

5 - वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था, इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुलकी स्थापना की |

6 - इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए,

7 - कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था,

8 - विकुक्षि के पुत्र बाण हुए,

9 - बाण के पुत्र अनरण्य हुए,

10- अनरण्य से पृथु हुए,



 


Friday, May 2, 2025

4>|| রামজন্ম ভূমি মন্দিরের বিবরণ ||

   4>|| রামজন্ম ভূমি মন্দিরের বিবরণ ||

         

অযোধ্যা রাম মন্দির প্রাণ প্রতিষ্ঠা::--

হিন্দি पौष शुक्ल, द्वादशी,विक्रम संवत 2080

सोमवार ।

A.D year 2024 -- 22 january.Monday.

বাংলা  ৭ মাঘ ১৪৩০ সোমবার।

शुभ दिन  प्रभु श्रीराम के बाल रूप नूतन विग्रह को, श्रीराम जन्मभूमि पर बन रहे नवीन मंदिर भूतल के गर्भगृह में विराजित करके प्राण- प्रतिष्ठा की जायेगी।


|| ॐ श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर का वीवरण ||
1● मंदिर परम्परागत शैली में निर्मित।
2● मंदिर की लंबाई (पूर्व- पशिचम) 380 फिट
      चौड़ाई 250 फिट एवं ऊँचाई 161 फिट।
3●तीन मंजिला मंदिर, प्रत्येक मंजिल की  
     ऊंचाई 20 फिट, कुल 392 खम्बे, 44
     दरवाजे।
4●भूतल गर्भगृह- प्रभु श्रीराम के बाल रूप
     (श्री रामलला) का विग्रह, प्रथम  तल
      गर्भगृह-श्रीराम दरबार।
5●कुल पाँच मंडप=नृत्यमंडप, रंग मंडप,
   गुढ़ मंडप ( सभा मंडप),प्रर्थना मंडप,
    कीर्तन मंडप।
6●खम्बे, दीवार में देवी-देवता तथा देवांगनाओं
     की मूर्तियाँ।
7●प्रोवेश पूर्व से, 32 सीढ़ीयाँ ( ऊँचाई 16.5
     फिट) चड़कर सिंहद्वार से प्रवेश होगा।
8●दिव्यांगजन तथा बृद्धो के लिए रैम्प  एवं
      लिफ्ट की व्यवस्था।
9●चारों ओर आयताकार परकोटा(প্রাচীর)
     (प्रकार)-लम्बाई 732 मीटर/0.732
     kilomitar/2401.57 feet.
      चौड़ाई 4.25 मीटर /13.93 feet.
      परकोटा के चार कोनों पर चार मंदिर--
     भगवान सूर्य, शंकर, गणपति, देवी भगवरी,
     परकोटे की दक्षिणी भुजा में हनुमान एवं
     उत्तरी भुजा में अन्नपूर्णा माता का मंदिर।

10●मंदिर के समीप पौराणिक काल का
       सिताकुप।
11●श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में
       प्रस्तावित अन्य मंदिर--महर्षि वाल्मीकि,
      महर्षि वसिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि
     अगस्त्य, निषादराज गुह, माता शबरी,
      एवं देवी अहिल्या।
12●दक्षिणी--पश्चिमी भाग में नवरत्न कुबेर,
        टीले पर स्थित शिव मंदिर का
        जीणोंद्धार ( সংস্কার) एवं रामभक्त   
        जटायु राज  प्रतिमा की स्थापना।
           ( संग्रहित)
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